आखिर भारत क्यों बनता जा रहा है विदेशी कार कंपनियों का कब्रिस्तान

धीरे-धीरे भारत कार्स कंपनियों (Cars Companies) के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। भारत की कई ऑटो मेकर कंपनी प्रॉफिट नहीं कर पा रही है अगर कोई कर भी रही है तो वो भी कुछ खास नहीं है। या यूँ कहें कि कोई भी अच्छे हालत में नहीं है।

हालाँकि कहा जाता है कि भारत में ऑटो मोबाइल सेक्टर के लिए बहुत सम्भावनायें हैं पर ये कागज़ों में है। असल में हकीकत कुछ और ही है। पिछलों कुछ सालों में भारत से विदेशी बड़ी कंपनियां जिनका अपने देशों में बड़ा नाम है वो भारत में कुछ कर नहीं पायी। और अंत में बहुत बड़े घाटे के साथ वो भारत से अपना बिज़नेस बंद करके निकल जाते हैं।

अभी फोर्ड मोटर्स (Ford Motors) ने भी भारत से बाहर जाने की घोषणा कर दी है। फोर्ड का अमेरिका में एक बड़ा नाम है पर वो भारत में करीब $2B के ऑपरेटिंग घाटे के साथ निकल रही है।

इससे पहले जनरल मोटर्स (General Motors) भी भारत से अपना बिज़नेस पूरी तरह से बंद करके जा चुकी है। जो कि अमेरिका के कार्स मार्किट (Cars Market) में एक बड़ा नाम है।

हार्ले डैविडसन (Harley Davidson), एक दिग्गज और मंहगी अमेरिकन बाइक मेकर भी भारत को टाटा बाई बाई कह चुकी है। हार्ले डैविडसन का अपना एक अलग ही फैन बेस है। जो लोग बाइक्स के शौकीन हैं वो जानते है कि हार्ले डैविडसन किस बला का नाम है। हार्ले डैविडसन ने पहली बार अमेरिका से बाहर अपना प्लांट लगाया था वो था भारत में। फिर भी हार्ले डैविडसन कुछ कर नहीं पायी और भारत से जाना पड़ा।

फ़िएट (FIAT) एक इटालियन कार मेकर जोकि अब भारत में नहीं है। फ़िएट 90’s में भारत में आया था लेकिन फिर भी कुछ नहीं कर पाया। फ़िएट (FIAT) भी इस मूल्य संवेदनशील बाजार (Price Sensitive Market) में प्रतिस्पादा को ज्यादा टाइम झेल नही पाया और आखिरकार भारत से जाना पड़ा।

मेरे हिसाब से ज्यादा टैक्स, मूल्य संवेदनशील बाजारऔर अनिश्चिता भरी भारत सरकार की नीतियां इसके मुख्य कारण हैं।

ज्यादा कर (Over Tax): भारत में करों का बोझ बहुत ज्यादा है। ज्यादा टैक्स होने की वजह से कंपनियों के ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ जाती है। और दुविधा वाली कर निति भी कंपनियों के घाटे में या भारत से बाहर जाने का कारण है। जिसके बहुत बड़े उदाहरण हैं नोकिआ  (Nokia)और वोडाफोन (Vodafone)। भारत सरकार को चाहिये कि वो कर निति (Tax Policy) को पारदर्शी बनाये।

मूल्य संवेदनशीलता (Price Sensitivity): भारत एक मूल्य संवेदनशील बाजार है। यहाँ संभावनाएं तो हैं लेकिन कंपनियों को साथ के साथ ये ध्यान भी रखना होगा कि भारत का कस्टमर गुणवत्ता के बजाय मूल्य की ओर ज्यादा आकर्षित रहता है। सुजुकी (Suzuki) ने यही फॉर्मूला अपनाया है जिस वजह से वो भारत के कार्स मार्किट पर राज़ करती है। सुजुकी के पास भारत का लगभग 50% बाजार हिस्सेदारी है। आपको सुजुकी की ज्यादा महँगी गाड़ियां नहीं मिलेंगी। सुजुकी कम दाम ज्यादा फीचर्स दे देती है। जोकि दूसरी कंपनियां नहीं कर पाती हैं। सुजुकी की ज्यादा बाजार हिस्सेदारी होने की वजह से वो ये कर पाती है।

नीति (Policy): भारत सरकार की व्यापारों को लेके नीतियों में कोई बदलाव नहीं होना या अत्यदिक बदलाव होने से भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। भारत सरकार ने नीतियों में आज समय के अनुसार कोई बदलाव नहीं किया है जोकि कई सालों से जस की तस पड़ी है या तो हर महीने उनमे कुछ ना कुछ बदलाव हो रहे हैं। एक ताज़ा उदाहण है ई-कॉमर्स पालिसी (E-Commerce Policy), भारत सरकार इसमें हर बार कुछ ना कुछ बदलाव किये जा रही है। जो कि कई बार राजनीति से भी प्रेरित होती हैं। कई बार तो ये बदलाव व्यवहारिक भी नहीं होते हैं। जिसका खमियाज़ा कंपनियों को भुगतना पड़ता है। कंपनियों को आज के समय के अनुसार एक टिकाऊ पालिसी चाहिए जिसमे कंपनियां सांस ले सके और अपने बिज़नेस को आगे बड़ा सकें।

फोर्ड कंपनी ने भारत में किया अपना कार बिज़नेस बंद

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फोर्ड कंपनी ने भारत में किया अपना कार मैनुफैचरिंग को पूरी तरह से बंद कर दिया है। पहले इस तरह की खबरें आ रही थी की फोर्ड भारत से अपना बिज़नेस समेट सकता है पर अब फोर्ड कंपनी इस खबर पर मुहर लगा दी है। फोर्ड ने ये ऑफिशियली घोषणा कर दी है।

फोर्ड ने तुरंत प्रभाव से भारत में नयी कार का उत्पादन बंद कर दिया है। हालाँकि जनरल मोटर की तरह फोर्ड पूरी तरह से भारत से नहीं जाएगी। फोर्ड मोटर्स पूरा कस्टमर सर्विस देती रहेगी, फोर्ड की गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स भी मिलते रहेंगे और फोर्ड के कस्टमरों को पूरी वारंटी भी मिलेगी। इसका मतलब ये है कि फोर्ड अपने कस्टमरों के लिये भारत में बनी रहेगी।

फोर्ड भारत में अपने चुनिंदा आउटलेट्स के माध्यम से मौजूद रहेगी जिसमे वो अपनी एक्सक्लूसिव कार्स (Cars) जेसे कि मस्टैंग कूप (Mustang Coupe), मस्टैंग मच-ई (Mustang Mach-E) इलेक्ट्रिक आदि कारों की बिक्री करती रहेगी। तेईस सालों के अपने भारत के सफर में फोर्ड कुछ खास नहीं कर पायी।

Comments (2)

  1. Avatar for Pawan Purohit
    Prashant Phartyal
    September 10, 2021
  2. Avatar for Pawan Purohit
    Arun Dwivedi
    September 11, 2021

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